उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ के पास हुए दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे ने चारधाम यात्रा में हवाई सेवाओं की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मौसम विभाग ने 30 अक्टूबर को चमोली जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था, तब भी बदरीनाथ धाम से हेलीकॉप्टर उड़ान कैसे भरते रहे? क्या मौसम की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया या फिर उड़ान की अनुमति देते समय सुरक्षा की कुछ शर्तों पर भरोसा किया गया?

30 अक्टूबर शुक्रवार को बदरीनाथ धाम से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड के लिए रवाना हुआ ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर जोशीमठ के पास हाथी पर्वत क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पायलट समेत हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई। मृतकों में पांच यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे। चमोली के जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों ने हादसे में छह लोगों की मौत की पुष्टि की है।

ऑरेंज अलर्ट के बीच क्यों जारी रहीं हेलीकॉप्टर सेवाएं?

इस हादसे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट को लेकर हो रही है। मौसम विभाग ने 30 अक्टूबर को चमोली जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। इसमें कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई थी। इसके साथ ही जिले में हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना भी जताई गई थी।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम की खराब स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने शुक्रवार सुबह 7:25 बजे सहस्रधारा से चारधाम रूट पर हेलीकॉप्टर सेवाएं अगले आदेश तक रोक दी थीं।

हालांकि, सुबह 9:27 बजे कुछ शर्तों के साथ चारधाम रूट पर उड़ान की अनुमति दे दी गई। आदेश में स्पष्ट किया गया था कि यदि बदरीनाथ और केदारनाथ रूट पर मौसम उड़ान के अनुकूल नहीं रहता है तो हेलीकॉप्टर को वापस सहस्रधारा लाया जाए। वहीं, बदरीनाथ से लौटते समय मौसम खराब होने पर हेलीकॉप्टर को फाटा, सिसरी या गुप्तकाशी जैसे वैली बेस पर उतरने के निर्देश थे।

रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को बदरीनाथ रूट पर देहरादून से कुल 13 उड़ानें हुईं और हादसे के बाद भी पांच उड़ानें बदरीनाथ धाम के लिए संचालित हुईं। इस घटनाक्रम ने उड़ानों की अनुमति और मौसम संबंधी निर्णयों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दोपहर 1:14 बजे बदरीनाथ से भरी थी उड़ान

नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर VT-HCX (AS350B3) शुक्रवार को दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर बदरीनाथ हेलीपैड से रवाना हुआ था।

हेलीकॉप्टर को देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड पहुंचना था। इसमें पायलट समेत कुल छह लोग सवार थे। बदरीनाथ से उड़ान भरने के बाद हेलीकॉप्टर जब जोशीमठ घाटी के आसपास पहुंचा तो उसका संपर्क टूट गया।

इसके बाद हेलीकॉप्टर की लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम पर भी दिखाई देनी बंद हो गई। काफी देर तक संपर्क नहीं होने पर प्रशासन और बचाव दल सक्रिय हो गए।

हाथी पर्वत के पास पहाड़ी से टकराया हेलीकॉप्टर

जिला प्रशासन की कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, हेलीकॉप्टर वापसी के दौरान हाथी पर्वत क्षेत्र में प्रतिकूल मौसम की चपेट में आया। यह निचले इलाके की ओर उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

हादसा जोशीमठ तहसील के चाई गांव के पास स्थित जंगल क्षेत्र में हुआ। सेना के सिग्नल सेंटर की टीम ने इलाके में धुआं उठते देखा। अधिकारियों के मुताबिक, टीम ने हेलीकॉप्टर को तेजी से नीचे की ओर आते हुए भी देखा था।

इसके बाद सेना, एसडीआरएफ, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हुईं। पहाड़ी क्षेत्र, घने जंगल और दुर्गम रास्तों के कारण बचाव अभियान में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

हादसे में पायलट समेत छह लोगों की मौत

इस दुर्घटना में हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की जान चली गई। मृतकों में एक पायलट और पांच यात्री शामिल थे। पांचों यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे और चारधाम यात्रा पर उत्तराखंड आए थे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतकों में बेंगलुरु के सीसीबी की टेक्निकल सेल में तैनात पुलिस इंस्पेक्टर अरुण सालुंके, हासन के व्यवसायी प्रताप बाचिहल्ली निंगराजू, अधिवक्ता सुधीर के., अधिवक्ता शंकरगौड़ा वीबी और तुमकुरु के एचएस नटराज शामिल थे।

पांचों यात्री आपस में परिचित थे और उन्होंने साथ मिलकर चारधाम यात्रा की योजना बनाई थी। धार्मिक यात्रा पूरी करने के बाद वे वापस देहरादून लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में यह दर्दनाक हादसा हो गया।

ट्रांस भारत एविएशन के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े को किया गया ग्राउंड

हादसे के बाद उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण ने एहतियात के तौर पर ट्रांस भारत एविएशन के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े को ग्राउंड कर दिया है। इसका मतलब है कि कंपनी के हेलीकॉप्टरों की उड़ानें फिलहाल रोक दी गई हैं।

वहीं, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की टीम को देहरादून भेजा गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में बताया कि दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर VT-HCX के मामले में प्रारंभिक और नियामकीय आकलन किया जाएगा।

हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

क्या केवल खराब मौसम बना हादसे की वजह?

हेलीकॉप्टर दुर्घटना के पीछे खराब मौसम एक महत्वपूर्ण संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन अभी इसे अंतिम कारण घोषित नहीं किया गया है।

हिमालयी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर उड़ाना सामान्य मैदानी उड़ानों से काफी चुनौतीपूर्ण होता है। यहां अचानक बादल घिरने, तेज हवाएं चलने, बारिश और बर्फबारी से दृश्यता प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा संकरी पहाड़ी घाटियां, ऊंचे पर्वत और बदलती हवाओं की दिशा भी उड़ान को कठिन बना सकती हैं। ऐसे इलाकों में पायलट को मौसम और दृश्यता के आधार पर लगातार निर्णय लेने पड़ते हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में भी पहाड़ी घाटियों में अचानक मौसम बदलने और बादलों के कारण उड़ान संबंधी चुनौतियों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, जोशीमठ हादसे में मौसम के अलावा किसी तकनीकी या अन्य कारण की भूमिका थी या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

अब इन सवालों के जवाब तलाश रही जांच एजेंसियां

इस हादसे के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं:

  1. जब चमोली में ऑरेंज अलर्ट जारी था तो उड़ान की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई?

  2. सुबह हेलीकॉप्टर सेवाएं रोकने के बाद किन मौसम संबंधी मानकों के आधार पर दोबारा उड़ान की अनुमति दी गई?

  3. क्या उड़ान से पहले मौसम की स्थिति का पर्याप्त आकलन किया गया था?

  4. क्या हेलीकॉप्टर में कोई तकनीकी खराबी आई थी?

  5. क्या खराब दृश्यता और तेज हवाओं के कारण हेलीकॉप्टर अपना निर्धारित मार्ग नहीं पकड़ पाया?

  6. क्या पायलट को मौसम की खराब स्थिति के बारे में पर्याप्त जानकारी दी गई थी?

इन सवालों के जवाब DGCA की जांच और दुर्घटना से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही सामने आएंगे।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मौसम विभाग ने पहले ही खराब मौसम की चेतावनी दे दी थी, तब पहाड़ों में हेलीकॉप्टर उड़ानों के संचालन को लेकर क्या पर्याप्त सावधानी बरती गई? छह लोगों की जान लेने वाले इस हादसे ने चारधाम हेली सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है।