शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। शुक्रवार (17 जुलाई) को उनका अनशन 19वें दिन में प्रवेश कर गया। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक भोजन न लेने के कारण उनका शरीर अब ऐसे चरण में पहुंच रहा है, जहां किसी भी समय गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
9 किलो से ज्यादा वजन घटा, शरीर की ऊर्जा खत्म होने लगी
वांगचुक की मेडिकल टीम के अनुसार, अनशन शुरू होने के बाद से उनका 9 किलो से अधिक वजन कम हो चुका है। लगातार उपवास की वजह से शरीर पहले ग्लाइकोजन, फिर वसा (Fat) और अब मांसपेशियों (Muscles) से ऊर्जा लेने लगा है। डॉक्टरों का कहना है कि यही वह चरण है जहां शरीर धीरे-धीरे अपने ही ऊतकों को तोड़कर जीवित रहने की कोशिश करता है।
डॉक्टरों की चेतावनी- अब तीसरा चरण हो सकता है सबसे खतरनाक
डॉक्टरों ने बताया कि यदि अनशन ज्यादा लंबा खिंचता है तो शरीर ‘क्रिटिकल स्टेज’ में पहुंच सकता है। इस दौरान इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन, ब्लड प्रेशर का तेजी से गिरना, हृदय की धड़कनों में अनियमितता, किडनी और लीवर पर दबाव तथा कई अंगों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि फिलहाल वांगचुक मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क हैं, लेकिन उनकी मेडिकल निगरानी लगातार की जा रही है।
दिल्ली हाई कोर्ट की दखल, रोजाना हेल्थ चेकअप के आदेश
बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि सोनम वांगचुक की रोजाना मेडिकल जांच कराई जाए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि डॉक्टरों को लगे कि उनकी जान को खतरा है, तो आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप तुरंत किया जाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि “हर नागरिक का जीवन अनमोल है।” यह इस अनशन को लेकर अदालत की पहली बड़ी दखल मानी जा रही है।
अनशन खत्म करने से किया इनकार
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कई नेताओं, वकीलों और समर्थकों ने वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की है। लेकिन वांगचुक ने साफ कहा है कि वह अभी अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। उन्होंने समर्थकों से अपील की है कि वे 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करें।
आखिर क्यों कर रहे हैं अनशन?
सोनम वांगचुक का कहना है कि देश में हुई विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की खामियों से करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। वह इन मुद्दों पर जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर वह 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं।
क्या है सबसे बड़ी चिंता?
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक भूखे रहने पर शुरुआत में शरीर वसा से ऊर्जा लेता है, लेकिन बाद में मांसपेशियां भी टूटने लगती हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो हृदय, किडनी, लीवर और अन्य महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए हैं और नियमित जांच की सलाह दे रहे हैं।

