उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी की राजनीति केवल सत्ता तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनकी पहचान ईमानदारी, अनुशासन और निष्पक्ष निर्णयों के लिए बनी। यही वजह रही कि विपक्षी दलों के नेता भी उनकी कार्यशैली के प्रशंसक रहे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat ने खंडूड़ी से जुड़े कई पुराने अनुभव साझा करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उन्होंने हमेशा खंडूड़ी की साफ छवि और अनुशासित व्यवहार का सम्मान किया।
हरीश रावत ने बताया कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तब एक दिन बीसी खंडूड़ी अचानक उनके कार्यालय पहुंच गए। इस पर उन्होंने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि आप अचानक कैसे आ गए, तो खंडूड़ी ने मुस्कराते हुए कहा कि वह देखना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री किस तरह काम कर रहे हैं।
उन्होंने एक और दिलचस्प प्रसंग साझा करते हुए बताया कि जब खंडूड़ी मुख्यमंत्री थे, तब उनसे मिलने के लिए 20 मिनट का समय तय हुआ था। मुलाकात से पहले खंडूड़ी ने खुद तीन बार फोन कर समय पर पहुंचने की याद दिलाई, ताकि आगे के सरकारी कार्यक्रम प्रभावित न हों।
पूर्व मंत्री Harak Singh Rawat ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष रहते हुए भी उन्होंने महसूस किया कि खंडूड़ी कभी विपक्ष को नजरअंदाज नहीं करते थे। विपक्ष की ओर से दिए गए सुझावों को वह गंभीरता से सुनते और उन पर विचार करते थे।
वहीं नेता प्रतिपक्ष Yashpal Arya ने भी बीसी खंडूड़ी को अनुशासित और मर्यादित राजनीति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि 2007 से 2012 के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए उनका खंडूड़ी से लगातार संवाद रहा और महत्वपूर्ण मुद्दों पर वह हमेशा विपक्ष को विश्वास में लेते थे।

