उत्तराखंड में खेल क्षेत्र को नई दिशा देने वाली एक बड़ी प्रशासनिक सफलता हासिल हुई है। राज्य के पहले खेल विश्वविद्यालय के निर्माण का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 12.317 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह विश्वविद्यालय नैनीताल जिले के हल्द्वानी वन प्रभाग के अंतर्गत गोलापार क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा।

राज्य सरकार इस परियोजना को उत्तराखंड के खेल ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देख रही है। खेल मंत्री Rekha Arya ने इसे प्रदेश के खेल भविष्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार खेल अवस्थापना को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं होगा, बल्कि यह आधुनिक खेल प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, अनुसंधान और उच्च स्तरीय कोचिंग का प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलेंगे।

सरकार का मानना है कि विश्वविद्यालय बनने से उत्तराखंड के खिलाड़ियों को अपने राज्य में ही आधुनिक खेल शिक्षा और प्रशिक्षण मिलेगा। इससे खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार और खेल उद्योग से जुड़े नए अवसर भी पैदा होंगे।

कुछ शर्तों के साथ मिली मंजूरी

केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने परियोजना को कुछ विशेष शर्तों के साथ स्वीकृति दी है। आदेश के अनुसार, वन विभाग द्वारा प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) किया जाएगा। इसके तहत खेरनी बेतालघाट गांव में 24.364 हेक्टेयर सिविल सोयम भूमि तथा दक्षिण जसपुर, मालधन बीट के निर्धारित क्षेत्र में 49.268 हेक्टेयर डीएफएल भूमि पर पौधारोपण और वन विकास कार्य किए जाएंगे।

इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र के संतुलन को बनाए रखने के लिए मंत्रालय ने कई अन्य दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। राज्य सरकार को इन सभी शर्तों का पालन करते हुए निर्माण कार्य आगे बढ़ाना होगा।

माना जा रहा है कि इस स्वीकृति के बाद खेल विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य में तेजी आएगी और आने वाले वर्षों में उत्तराखंड देश के प्रमुख खेल केंद्रों में शामिल हो सकता है।